बस तू आगे बढ़ता जा तू बढ़ता जा

बस तू आगे बढ़ता जा तू आगे बढ़ता जा

तू आगे बढ़ता जा तू बढ़ता जा
छोड़ दे कल की फिकर
भूल जा अगर मगर
पुराने पछतावे छोड़
आज के परिश्रम से तू नाता जोड़
तू एक राही है बस तू बढ़ता जा
ना ही थकना और ना ही रुकना
बस तू आगे बढ़ता जा बस तू बढ़ता जा

रास्ता अभी काफी गहरा है,
तेरे डूबते नाव को बस तेरा ही सहारा है।
इस रंगभूमि मैं तू एक छोटा सा कलाकार है
आज तेरा किरदार छोटा है लेकिन कल होगा बड़ा
ज्यादा परेशान मत हो कि कैसे होगा बडा?
बस अपने इरादों पर हो खड़ा।
बस तू आगे बढ़ता जा तू बढ़ता जा

शिकायत करने वाले होंगे हजार सिखाने वाले होंगे कहीं,
पर तू कर ना वही जो तेरे दिल को लगे सही।
सिर्फ आकाश देखने से नहीं आकाश प्राप्त होती है,
एक-एक इंदन की बूंद से उड़ान बनती है।
विरासत में खुशी पाने वालों को खुशी का मोह कहा
खुशी की कीमत जाननी है तो उससे पूछ जो हर पल खुशी पाने के लिए जल रहा
बस तू आगे बढ़ता जा बस तू बढ़ता जा।

कुछ मिनटों में यूं ही पहचान मिलती नहीं
दिन-रात घंटे लगाने पड़ते हैं तब जाकर आशा की किरण दिखती है
जीतता वो जहाज ही जो तूफानों में भी अड़ा रहता है।
यह उसकी ज़िद्द है जो उसको तट का सुख देता है
जो हालत तो से डरता नहीं, उसे से लड़ता है
वही अंत में बाजी मार कर आगे बढ़ जाता है।
गिरके फिर से उठकर चलना सीख जा
अपनी तकदीर खुद अपने हाथों से तू लिखता जा
बस तू आगे बढ़ता जा तू बढ़ता जा।

                                          – Aditya Agarwal

मानव का रास्ता

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Kavita to jo apka jina sika degi

रास्ते अक्सर देर से मिलते हैं,

यह उनका स्वभाव है।

उन्हें कभी भी अकेले ना रहने देना ,

मानव का धर्म है।

सूर्योदय रोज होता है,

यह जीवन का सत्य है,

अपनी भितर की बुराई भुलाकर ,

नया दिपक जलाना , मानव कर्म है।

हरी भरी संसार , अवर्णीय दृश्य,

यह जीवन का सुंदर सार है।

पर भ्रष्ट मनुष्य,पैसों के मोहक,

पर्यावरण इनके लिए भार है।

इक इक मिट्टी का दाना बनाना,

पयंभर का श्रम था।

दुनिया में नाम बनाना ,

यह मानव तेरा श्रम है।

है मानव,

कर्म कर भगवान की तरह,

मेहनत कर शेतान की तरह।

तप कर ऋिषि की तरह

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